यादें
इक बार कहीं से आ जाओ, जी भर के कर लूँ प्यार तुम्हे
नयनों में करके बन्द निहारुँ, हर पल बारम्बार तुम्हे
भाव पिरो कर के शब्दों में, यादों का करके शृंगार
प्रेम-विरह की कविता का, पहनाऊँ पुष्पाहार तुम्हे
इक बार कहीं से आ जाओ, जी भर के कर लूँ प्यार तुम्हे
कभी नहीं माँगा कुछ मुझसे, हर सुख दुख में साथ रही
किया समर्पित तन मन मुझ पर, बस छोटी सी चाह रही
प्यार मुझे तुम करते हो ना, साथ मुझे हरदम रखना
लिखना इक छोटी सी कविता, मुझको करके याद कभी
जब आओगी दिखलाऊँगा, यादों का संसार तुम्हे
इक बार कहीं से आ जाओ, जी भर के कर लूँ प्यार तुम्हे
कभी डाँट देता था तुमको, कभी झगड़ता था इतना
रो देती थी तुम डर कर फिर, प्यार उमड़ता था इतना
फिर दर्द भुला करके सारे, तुम सीने में छुप जाती थी
कभी नहीं झगड़ेंगे अब हम, फिर ऐसे वादे करना
रूठूँ तुमसे प्यार करुँ फिर, तुम पर है अधिकार मुझे
इक बार कहीं से आ जाओ, जी भर के कर लूँ प्यार तुम्हे
नयनों में करके बन्द निहारुँ, हर पल बारम्बार तुम्हे