महाबलेश्वर
दे रहीं हैं सदा, वादियाँ खूबसूरत
ये मदमाती शीतल, हवा गा रही है
उधर नाचता है, वो सावन सजीला
जवाँ रुत ये, अंगड़ाईयाँ ले रही है
झील के सीने में ये मचलती तरँगें
कश्तियों संग परिहास हैं कर रही
माँझी के विरह भरे गान सुन
अम्बर की भी आँखें, करुण हो रहीं
मिल प्रेयसी संग, कोई हँस रहा है
तो यादें किसी को, तड़पा रही हैं
दे रहीं हैं सदा, वादियाँ खूबसूरत
ये मदमाती शीतल, हवा गा रही है
मखमल सी हरियाली, चुनरी लपेटे
खिल सी गई मानों, हैं घाटियाँ
फूलों से, खेतों से, पेड़ों से जैसे,
किसी ने सजाई हों, फुलकारियाँ
छाई जो शबनम, तो दुल्हन धरा मानो,
घूँघट में शरमा के जा छुप रही है
दे रहीं हैं सदा, वादियाँ खूबसूरत
ये मदमाती शीतल, हवा गा रही है