श्री गणेश वन्दना
विघ्नेश्वरा, लम्बोदरा,
सिद्धि
विनायक
गजानना
भावमय होकर करें, हे प्रभु, तव अर्चना
हे देव, देवाधिदेव, हे देव, देवाधिदेव
करदो सफल आराधना
भावमय … … … … … … … … … …
शुभ्र-ज्योतिर्मय, निरामय, विमल मति का दान दो
कर्म करुणामय, स्नेहमय, आचरण भगवान दो
बिन्दु से हम सिन्धु बन, करें विश्व मंगल कामना
भावमय … … … … … … … … … …
सृष्टि के हर एक कण में, तुम ही भरते प्राण हो
कष्टों से संतप्त हृदयों, का तुम्ही से त्राण हो
कर कृपा सर्वत्र कर दो, धर्म की संस्थापना
भावमय … … … … … … … … … …
आरती के मधुर स्वर की, पावनी झंकार हो,
अचल छवि मन-मोहिनी, मेरी भक्ति का आधार हो,
प्रेम तरुवर पल्लवित हों, है परम संकल्पना
भावमय … … … … … … … … … …
हे देव, देवाधिदेव, हे देव, देवाधिदेव
करदो सफल आराधना
भावमय … … … … … … … … … …